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कोणार्क सूर्य मंदिर: विश्व धरोहर की महत्वपूर्ण धारा

भारत एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से भरपूर देश है, और इसका सबूत है कोणार्क सूर्य मंदिर, जो एक विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।

कोणार्क सूर्य मंदिर के विशेषताएँ:

  1. आर्किटेक्चरल ग्रेन्डर: कोणार्क सूर्य मंदिर की विशालकाय आर्किटेक्चर और अद्वितीय डिज़ाइन इसे एक अद्वितीय धारोहर बनाते हैं। इसकी सुंदर और जटिल भाषा दर्शाती है कि उस समय के शिल्पकला कितनी महत्वपूर्ण और विकसित थी।
  2. सूर्य की पूजा: कोणार्क सूर्य मंदिर में सूर्यदेव की पूजा की जाती थी, और यह बात उस समय के भारतीय समाज के धार्मिक और सांस्कृतिक आदर्शों को दर्शाती है।
  3. कमलसिल्क मोजूला: मंदिर की मुख्य भव्यता ‘कमलसिल्क मोजूला’ नामक विशेषता से होती है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह सूर्य की रथ यात्रा की प्रतीक होती थी।
  4. वास्तुशास्त्र का आदर: कोणार्क सूर्य मंदिर की वास्तुशास्त्र में महत्वपूर्ण भूमिका है। इसका निर्माण इस सिद्धांत पर हुआ है कि सूर्य की किरणों को सबसे अधिक प्राप्ति हो सके।
  5. विशालकाय चर्च: कोणार्क सूर्य मंदिर की विशालकाय चर्च उस समय की गरिमा और गरिमान कला की याद दिलाती है। इसके सुंदर स्तूपों और कलात्मक भवन निर्माण में आदर्श की भावना आती है।

नोट:

कोणार्क सूर्य मंदिर एक विश्व धरोहर स्थल होने के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का प्रतीक भी है।